लक्सर, गुरप्रीत सिंह। उत्तराखंड में कृषि नवाचार और महिला उद्यमिता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण सामने आया है, जहां “वर्णम” (Varnam) स्टार्टअप ने मखाना (Fox Nut) की खेती के रूप में एक अभिनव पहल शुरू की है। इस पहल का नेतृत्व श्रीमती सोनल जैन एवं श्रीमती मंजू भसीन द्वारा किया जा रहा है।
कार्यक्रम में Ganesh Joshi, कृषि मंत्री, उत्तराखंड की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर श्री राजीव रंजन (चेयरमैन, Manigachimidas Farmer Producer Company Ltd.), श्री राजेश शर्मा, श्री अजय पनियुली, श्री रोहताश सहरावत, कर्नल विनोद कुमार पनियुली (प्रदेश एवं जिला कृषि मंत्री) तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
जानकारी के अनुसार, जिस भूमि पर यह परियोजना शुरू की गई है, वह वर्ष में लगभग 5 से 6 महीने जलमग्न रहती है और पारंपरिक फसलों के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती थी। इस चुनौती को अवसर में बदलते हुए, “वर्णम” ने मखाना जैसी जल-आधारित फसल को अपनाया।
मखाना की खेती के लिए तकनीकी मार्गदर्शन Darbhanga, Bihar स्थित विशेषज्ञों एवं Manigachimidas Farmer Producer Company Ltd. के सहयोग से प्राप्त किया गया। विशेषज्ञों द्वारा स्थल पर जाकर चरणबद्ध प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिसके आधार पर उत्तराखंड के लक्सर क्षेत्र के गंदासपुर गांव में इस परियोजना को पायलट रूप में लागू किया गया है।
मखाना, जो परंपरागत रूप से बिहार का प्रमुख उत्पाद रहा है, अब उत्तराखंड में नई संभावनाओं के साथ उभर रहा है। यह पहल राज्यों के बीच कृषि तकनीक और ज्ञान के आदान-प्रदान का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
आर्थिक दृष्टि से मखाना खेती किसानों के लिए एक अत्यंत लाभकारी विकल्प के रूप में सामने आ रही है। एक बीघा भूमि में लगभग 8–10 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है, जबकि 4–6 क्विंटल तक उत्पादन संभव है। वर्तमान बाजार में मखाना का मूल्य ₹800 से ₹1,200 प्रति किलोग्राम तक होने के कारण किसानों को प्रति बीघा ₹2 से ₹4 लाख तक की संभावित आय प्राप्त हो सकती है।
इस पहल के माध्यम से न केवल जलभराव वाली भूमि का उपयोग संभव हो रहा है, बल्कि किसानों के लिए आय के नए स्रोत भी विकसित हो रहे हैं। साथ ही, यह मॉडल कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस अवसर पर Ganesh Joshi ने कहा कि इस प्रकार के नवाचार राज्य में कृषि के नए आयाम स्थापित कर सकते हैं और सरकार ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह पायलट परियोजना सफल रहती है, तो भविष्य में उत्तराखंड में मखाना उत्पादन का एक संगठित क्लस्टर विकसित किया जा सकता है, जिससे राज्य के किसानों को व्यापक लाभ मिलेगा।
जारीकर्ता:
Manigachimidas Farmer Producer Company Ltd.
दरभंगा, Bihar
